Decision Making Tips in Hindi – Secrets जो श्री कृष्ण ने कहा अर्जुन से

Decision making tips in hindi – नमस्कार दोस्तों , फिर से आपका स्वागत है www.AniCow.com पर | हमेशा की तरह आज भी मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक interesting article | आज का मेरा ये आर्टिकल self development के ऊपर है जिसमे मैं आपको बताने वाला हूँ decision making tips in hindi |

दरअसल ये tips मैंने एक online magazine पर पढ़ा जिसका title था “Decision making tips as explained in Bhagwat Geeta” | दोस्तों वैसे तो आपको पता ही होगा की “भगवत गीता” में जीवन के हर उलझन का उपाय है |

मुझे आर्टिकल काफी अच्छा लगा क्युकि उसमे जिन टिप्स के बारे में चर्चा की जा रही थी वो श्री कृष्ण महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन से कहते है | मुझे वो टिप्स काफी पसंद आए और logical लगे , इसलिए उन्हें यहाँ आपके सामने रख रहा हूँ |

 

उम्मीद करता हूँ की इन् टिप्स की मदद से आपके decision making power में वृद्धि होगी और आप किसी भी परिस्थिति में quick decision ले पाएंगे |

decision making tips in hindi - how to take decision
decision making tips in hindi – how to take decision

 

Decision making tips in hindi – How to take right decisions – 4 Golden rules

 

सुख और दुःख compromise rule –

सोचो अगर आपके सामने 2 options है ; एक सुख का और एक दुःख का | आप किसे choose करेंगे? जाहिर सी बात है की आप सुख का रास्ता choose करेंगे | लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता , कभी कभी हमे परिस्थिति के उल्टा भी जाना पद सकता है |

महाभारत में अर्जुन युद्ध नहीं लड़ना चाहते थे क्युकि अर्जुन को अपने भाई, सगे संभंधि और अपने गुरु को खोने का डर था | लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को धर्म समझाते हुए युद्ध लड़ने का मार्ग दिखाया |

दोस्तों हमे भी कई बार अपने decision feelings के base पर नहीं लेने चाहिए | हमे अगर दुःख का मार्ग चुनना पड़े तो हमे comfort zone से बाहर निकलकर decision लेना चाहिए |

Difficult road sometimes reach to your destination fast and quickly

 

बहुत ख़ुशी और बहुत दुखी ; ऐसी अवस्था में decision ना ले –

दोस्तों अक्सर ये देखा गया है की जब हम बहुत खुश होते है तो जल्दबाज़ी में decision ले लेते है और सामने वाला जो चाहता है उसे दे देते है | ठीक उसी तरह जब हम बहुत दुखी होते है तो सामने वाले के साथ किसी भी छोटी से बात पर भी rudely पेश आते है |

इसलिए ऐसे दो अवस्थाओं में हमे decision जल्दबाज़ी में नहीं लेना चाहिए | उस दौरान हमे अपने mind को balance कर लेना चाहिए | क्युकि ये दो feelings और emotions सिर्फ कुछ पल के मेहमान होते है , और ऐसे परिस्थिति में हम अपने normal mind से सोच नहीं पाते और जल्दबाज़ी कर बैठते है |

इसलिए इन् दोनों परिस्थितियों में जल्दबाज़ी में decision ना ले , mind को balance करे और इन परिस्थितियों को गुजरने दे फिर decision ले |

 

Decision लेते समय कोई attachment ना रखे –

जब भी हम decision लेते है तो कभी कभी किसी के साथ personal attachment होने के कारण decision उसके पक्ष में ले लेते है | भगवत गीता में ये उल्लेख है की decision लेते समय क्रोध और मोह से दूर रहे | अगर decision लेते समय आप personal attachment रखते है तो शायद आपका decision future में गलत साबित हो सकता है |

 

कर्म करे और फल की चिंता ना करे, फल अक्सर थोड़ी देर बाद ही मिलता है –

अक्सर ये भी देखा जाता है की हम मेहनत तो बहुत करते है लेकिन उसके स्वरुप हमे फल नहीं मिलता , और इस वजह से हम मेहनत करना छोड़ देते है और shortcut की तरफ बढ़ने लगते है | और बाद में हमारा ये decision हमारे लिए मुसीबत बन जाता है |

भगवत गीता में कहा गया है की “कर्म कर और फल की चिंता ना कर” | ठीक यही हमारे real life में भी लागू होता है |

उदहारण के तौर पर आप वजन घटाने के लिए पिछले 2 सप्ताह से रोज़ सुबह “morning walk” कर रहे है | लेकिन आपको कोई result नहीं मिल रहा है | आप फिर 2 सप्ताह और मेहनत करते है लेकिन फिर भी कोई result नहीं | फिर आप एकदम से decision लेते है और morning walk पर जाना बंद कर देते है |

फिर कुछ समय बाद ज्यादा मोटापा की वजह से आप डॉक्टर के पास जाते है और सब कुछ बताते है | और डॉक्टर आपसे कहता है की आप सही जा रहे थे बस आपको अपने diet पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए था | अब इस बार आपको वो मेहनत फिर से करनी पड़ेगी और पहले से शुरुवात करनी पड़ेगी |

इसलिए आप कर्म कर रहे है और रिजल्ट उसके अनुरूप नहीं मिल रहा है तो जल्दबाज़ी में उसे छोड़ने का decision ना ले | जहा चूक हो रही है उसे निकाले और बस उसे थोड़े अलग तरह से करने की कोशिश करे, थोड़ी देर ही सही लेकिन success जरूर मिलेगा |

If your formula is not working then change the formula, not the route..

 

Final words –

दोस्तों मैं उम्मीद करता हूँ की आज के इस आर्टिकल के माध्यम से अपनी बात रख पाया हूँ | आशा करता हूँ आज के बाद से आप जल्दबाज़ी में decision नहीं लेंगे और पूरी तरह से सोच विचार के बाद अपनी राय रखेंगे चाहे स्तिथि आपके अनुकूल हो या प्रतिकूल | यही एक अच्छे leadership की पहचान है !!!

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