safalta ki kahani

Safalta ki Kahani – Moral story in hindi | माता पिता का रखो ख्याल

Safalta ki Kahaniकहते है की सफलता की सीढ़ी माता पिता के चरणों से होकर जाती है| नमस्कार दोस्तों, मैं अनिरुद्ध फिर से आप सभी का स्वागत करता हूँ मेरे ब्लॉग Anicow.com पर| दोस्तों आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक safalta ki kahani. आज की moral story में एक किरदार है – गणेश, जो अभी 11th standard में पढ़ाई कर रहा है| गणेश का स्कूल गांव से 5 km की दुरी पर स्तिथ है| वो काफी simple रहना पसंद करता है और पढ़ाई में काफी अव्वल है| उसके स्कूल के बाकी दोस्त उसे पढ़ाकू बुलाते है और चिढ़ाते है| लेकिन गणेश इन सब से दूर किताबो में खोया रहता है|

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Moral story in hindi – स्कूल में inspection

एक दिन school में inspection के लिए शहर से शिक्षा मंत्री आते है| उनका मुख्य उद्देश्य है senior कक्षा के छात्रों को प्रोत्साहन देना है| इसके साथ साथ स्कूल की शिक्षा प्रणाली पर नज़र देना भी है| वो आते ही सीधे प्रिंसिपल के ऑफिस में चले जाते है| स्कूल का प्रिंसिपल मंत्री जी का स्वागत काफी धूम धाम से करता है|

प्रिंसिपल : बोलिए सर, क्या क्या देखना चाहेंगे आप इस स्कूल में?

मंत्री : मैं स्कूल के senior classes की शिक्षा प्रणाली का दौरा करना चाहूंगा|

फिर मंत्री जी और प्रिंसिपल कक्षा 11 में जाते है| वहाँ सारे बच्चे खड़े होकर मंत्री जी का स्वागत करते है| सबके चेहरे में ख़ुशी देख कर मंत्री समझ जाता है की ये सब काफी confident है|

Safalta ki kahani – मंत्री करते है बच्चो से सवाल

मंत्री जी ने एक एक करके 11th कक्षा के सारे students को प्रश्न पूछा| सारे बच्चो ने सही answer दिया| फिर मंत्री जी ने moral values पर सवाल पूछने की सोची| फिर मंत्री जी ने पूछा-

मंत्री : अच्छा बच्चो, अब सब एक एक करके ये बताएँगे की “अगर आपको अभी 500 रुपये मिल जाए तो आप क्या क्या करोगे”?

सभी बच्चो ने अलग अलग उत्तर दिया| किसी ने कहा वो किताब खरीदेगा, किसी ने कहा cycle खरीदेगा ताकि स्कूल समय पर आ सके, किसी ने कहा जमा करके रखेगा| लेकिन गणेश का उत्तर सुनकर मंत्री जी काफी हैरान हुए| गणेश ने कहा –

गणेश : मैं बाबा के लिए एक चश्मा और माँ के लिए एक कंगी खरीदूंगा| बाबा को अख़बार पढ़ने में काफी असुविधा होती है और माँ रोज़ बाबा से कंगी लाने को कहती है लेकिन बाबा भूल जाते है|

बाकी सब बच्चे ये सुनकर हंस रहे थे लेकिन एक पल के मंत्री जी की आँखे भर आई| वहाँ खड़ा प्रिंसिपल भी काफी हैरान था|

Moral story in hindi – मंत्री जी ने की प्रिंसिपल से एक मूल्यवान टिप्पणी

Inspection ख़तम करने के बाद मंत्री जी प्रिंसिपल रूम में जाते है और प्रिंसिपल के साथ बैठ कर बातें करते है|

मंत्री : सिंह जी, आपके स्कूल में शिक्षा व्यवस्था काफी अच्छी है| सब कुछ syllabus के अनुसार चल रहा है|

प्रिंसिपल : धन्यवाद मंत्री जी!

मंत्री : अच्छा, जरा उस लड़के का नाम बताएं जो 11th standard में है| जिसने सबसे अलग उत्तर दिया|

प्रिंसिपल : अच्छा, शायद आप गणेश की बात कर रहे है| वो बहुत scholar बच्चा है|

मंत्री : सिंह जी, किताबों के पन्ने पढ़कर तो कोई भी अव्वल बन सकता है| लेकिन बात है moral values की| इस छोटी सी उम्र में उसका जवाब दिल को छू लेने वाला था| ये बच्चा दूसरों के problems को solve करने के लिए जीता है| इसके सपने अलग है| और इसने शुरुवात अपने घर से कर दी है|

ये खेलने कूदने की उम्र है| अभी तो जीवन इनका शुरू ही नहीं हुआ है| और ऐसे में इतने उच्च विचार| आप लिख लीजिए ये बच्चा ‘कुछ बड़ा करेगा’|

Moral story in hindi – मंत्री जी की बातें सही साबित हुई

सात साल बीत चुके थे| आज शिक्षा मंत्री राज्य के मुख्य मंत्री बन चुके थे| मंत्री जी को एक नए मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के लिए जाना था| जिले के collector बाबू, गृह मंत्री, Vice chancellor जैसे बड़े व्यक्तित्व भी उद्घाटन में आने वाले थे|

उद्घाटन समारोह आरम्भ हो चूका था| जिले का पहले मेडिकल कॉलेज था| कलेक्टर बाबू का बड़ा योगदान रहा है इसे बनाने में| मेडिकल students ने कई presentation दिए, गांव और जिले में कई medical camp बनाने का project सामने रखा| अब कलेक्टर बाबू को स्टेज में बच्चो का मनोबल बढ़ाने के लिए बुलाया गया| और हो भी क्यों ना; कलेक्टर बाबू जिले के नौजवानों के लिए एक मिशाल थे| कलेक्टर बाबू के स्टेज पर चढ़ते ही तालियों के गरगराहट से उनका स्वागत किया गया| कलेक्टर बाबू के भाषण शुरू होने के साथ ही सामने VIP Seat पर बैठे मुख्य मंत्री साहब को कुछ याद आ गया| उन्होंने तुरंत अपने बगल में बैठे secretary से बात की और कलेक्टर के बारे में पूछा|

मंत्री : अच्छा ये कलेक्टर बाबू काफी पहचाने से लगते है| क्या नाम है इनका?

सेक्रेटरी : जी सर, ये इस राज्य के सबसे कम उम्र के collector है, गणेश आचार्जी| पास के गांव से ही पढ़ाई की है|

मंत्री : कौन, अपने सिंह साहब के स्कूल से?

सेक्रेटरी : जी हां सर!

अब मंत्री जी को समझने में देर ना हुई| वो उस 11th में पढ़ने वाले गणेश को पहचान चुके थे| वहाँ कलेक्टर बाबू के भाषण ख़तम होते ही वो नौजवानों से घिर गए| सभी उनसे ऑटोग्राफ ले रहे थे, कुछ हाथ मिला रहे थे, और उत्साहित भीड़ उन्हें salute कर रही थी|

Safalta ki kahani – गणेश पहचान चूका था मंत्री जी को

अब उद्घाटन की बारी थी| मंत्री साहब, collector बाबू, chancellor साहब सब स्टेज पर पहुंचे| मंत्री जी को उद्घाटन करना था| जैसे ही collector गणेश मंत्री जी के सामने आया, उसे बचपन का कुछ याद आने लगा| तभी मंत्री जी ने कलेक्टर बाबू को कहा-

मंत्री : माँ और बाबा कैसे है तुम्हारे? बाबा की आँखे कैसी है, अभी अख़बार पढ़ लेते है?

गणेश मंत्री जी को अब पहचान चूका था| वो झुक कर जैसे ही मंत्री जी को प्रणाम करने के लिए आगे बढ़ा, मंत्री जी ने उसे रोक कर गले से लगा लिया और कहा-

मंत्री : बेटा अब सच में लग रहा है की हमारा जिला सही हाथों में गया है! उम्मीद करते है जिस तरह से तुम अपने परिवार का ख्याल रखते थे और इस जिले को भी परिवार की तरह देखोगे|

इतना कहकर मंत्री जी ने गणेश का पीठ थपथपाया!

Moral of the story –

दोस्तों मंत्री जी ने जब गणेश की बातें स्कूल में सुनी थी तभी वो समझ चुके थे की गणेश एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा| माता पिता के प्रति उसके समर्पण को देखकर मंत्री जी ने तभी उसका भविष्यवाणी कर दिया था| और आज जीता-जागता प्रमाण सबके सामने था|

दोस्तों गणेश के अपने माँ-बाबा के प्रति समर्पण और श्रद्धा ने ही आज उसे इस लायक बनाया| क्योकि एक अच्छे समाज और चरित्र का गठन हमेशा एक परिवार से होता है| इसलिए अपने माँ-बाबा का ध्यान रखे, सफलता को आपके सामने झुकना ही पड़ेगा|

Jo apne mata pita ka khayal rakhta hai, bhagwan uska khayal rakhta hai..!!

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