Rochak Kahani in hindi – “दो नावों पर पैर देकर मत चलो”

By | October 27, 2019

Rochak Kahani in hindi – नमस्कार दोस्तों, आपका स्वागत है Anicow.com पर| दोस्तों आज हम आपको बताने वाले है एक rochak kahani in hindi | आज की रोचक कहानी decision making पर है| शायद आपको भी अपने जीवन में कभी ना कभी ये असमंजस रहा होगा जब आपको २ चीज़ो में से किसी एक को चुनना हुआ होगा| आज की कहानी इसी पर based है|

किसी एक बड़े शहर में एक बड़ा आदमी (Arvind) रहता था जो काफी शांतिप्रिय था| उसे भाग दौड़ वाली ज़िन्दगी पसंद नहीं थी| वो लाइफ के हर पल को जीना चाहता था, और जी भी रहा था|

वो कोई मामूली आदमी नहीं था| वो अपने ही coaching center में Maths का टीचर था| और वो चुटकियों में Maths solve करने के लिए famous था| उसके पास कुछ ऐसी techniques / strategies थी जो आसानी से मिलना मुश्किल था|

लेकिन Arvind एक businessman भी था| ऐसा इसलिए क्योकि उसके पिताजी के गुजर जाने के बाद उसके नाम पर ३ petrol pumps थे, जिसे उसे संभालना पड़ता था| और पेट्रोल pumps से उसे लाखो की आमदनी होती थी| इसलिए वो सारा समय अपने petrol pumps पर बीतता था|

Rochak Kahani in hindi

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लेकिन फिर भी Arvind को लगता था की उसके जीवन में पैसा तो है लेकिन शांति नहीं है| बच्चो को Maths पढ़ाने में उसे शांति मिलती थी| लेकिन वो अपने 3 petrol pumps को छोड़ भी नहीं सकता था|

इसलिए उसने अपने तीनो पेट्रोल पंप के लिए 3 managers को नौकरी पर रखा था लेकिन वो लोग गबन करने लगे थे| कोई हिसाब ठीक से नहीं रखता था|

और दूसरी तरफ Arvind के Maths पढ़ाने के तरीके से हर माँ-बाप ये चाहते थे की उनके बच्चे Arvind के coaching classes में ही जाए| Arvind के कोचिंग सेण्टर में यूं तो और भी टीचर थे लेकिन हर बच्चा उन्ही से Maths पढ़ना चाहता था|

धीरे धीरे Arvind ने गरीब बच्चो को भी पढ़ाना शुरू कर दिया| वो शाम को ३ घंटे सिर्फ गरीब बच्चो को पढ़ाता था| धीरे धीरे अरविन्द को ये लगने लगा की उसे Maths पढ़ाने में आनंद मिल रहा है|

लेकिन दूसरी तरफ उसके ३ पेट्रोल पंप घाटे में चल रहे थे| फिर एक दिन अरविन्द को लगा की उसे पेट्रोल पंप में भी समय बिताना चाहिए नहीं तो वो पूरी तरह से बंद हो जाएंगे|

असल में बात ये थी की अरविन्द पूरी तरह से असमंजस में पड़ गया था| एक तरफ पेट्रोल पंप जहां से उसे लाखों की आमदनी होती थी| जिस से वो future में एक college खोलने की सोच रहा था|

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और दूसरी तरफ उसका Maths coaching class जहां रोज़ उसके students उसका इंतज़ार करते थे| वो करे तो क्या करे? कहाँ ज्यादा समय दे! वो परेशान रहने लगा|

फिर एक दिन सुबह उसके जीवन में 2 ऐसी घटनाएं घटी जिसने उसके सारे असमंजस को दूर कर दिया|

वो हमेशा की तरह सुबह morning walk के लिए निकला| वो एक पार्क के बीच में पेपर हाथ में लेकर पढ़ रहा था| तभी उसके पीछे से एक आवाज़ आयी-

“साहब आप एक side में खड़े हो जाए| यूं बीच में खड़े मत रहिये| मुझे रास्ता साफ़ करना है| इस तरह बीच में आप खड़े है की ना मैं इस तरफ का साफ़ कर पा रहा हूँ और ना उस तरफ का| आप एक side में खड़े हो जाए ताकि मैं आसानी से झाड़ू लगा सकू”|

दरअसल सुबह के समय पार्क का कर्मचारी रास्ता साफ़ कर रहा था लेकिन अरविन्द के रास्ते के बीच में खड़े हो जाने के कारण उसे असुविधा हो रही थी| इसलिए उस कर्मचारी ने अरविन्द को एक तरफ खड़े हो जाने को कहा|

लेकिन उस कर्मचारी के इस कथन से अरविन्द बहुत कुछ समझ चूका था| उसे ये समझ आ चुकी थी की कर्मचारी के इस कथन को कैसे उसे अपने जीवन में उतारना है|

वो ये समझ चूका था की वो अब तक दो नावों में पैर देकर चल रहा था, इसलिए उसका कुछ भी सही नहीं हो रहा था| ना ही उसकी coaching center सही से चल रही थी और ना ही उसके 3 pertol pumps | अब उसे किसी एक नाव पर पैर रखकर चलना होगा!!

फिर अरविन्द उस पार्क से घर की तरफ निकल रहा था तो रास्ते में उसने एक और अजीब चीज़ देखि| उसका एक दोस्त सुनील जो एक बड़े कपड़ों के मिल का मालिक था वो रास्ते के एक किनारे खड़े होकर एक NGO Team के साथ छोटे गरीब बच्चों को सुबह का नास्ता distribute कर रहा था|

अरविन्द ये देख कर आश्चर्यचकित हो गया| वो अपने दोस्त सुनील के पास जाकर बोला-

अरविन्द – अरे सुनील तू यहाँ क्या कर रहा है? Factory नहीं जायेगा?

सुनील – सुप्रभात अरविन्द!! तू यहाँ क्या कर रहा है?

अरविन्द – मैं तो morning walk के लिए आया था|

सुनील – अच्छा रुक थोड़ी देर| तू बैठ वहाँ bench पर, मैं बच्चों को नास्ते का पैकेट distribute कर दू फिर एक साथ घर के लिए निकलते है|

अरविन्द सामने पड़े बेंच पर जाकर बैठ गया और सुनील को देखने लगा| उसने सुनील को इतना खुश कभी नहीं देखा था| सुनील हर बच्चे को नास्ते का पैकेट दे रहा था और बोल रहा था अच्छे से पढ़ाई करना|

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फिर कुछ देर बाद सुनील अरविन्द के पास आया और बोला-

सुनील – अच्छा चल| घर निकलते है| अच्छा चाय पियेगा?

अरविन्द – नहीं यार! मैं घर जाकर चाय लूंगा|

सुनील – अच्छा चल चलते है| रास्ते में चलते चलते बात करेंगे|

फिर दोनों एक साथ घर की ओर चलने लगे और बात करने लगे-

अरविन्द – तू कब से NGO के साथ जुड़ गया|

सुनील – बस २ सप्ताह से यहाँ रोज़ आ रहा हूँ| ये NGO गरीब बच्चों को पढ़ाती है| तो मैंने भी इस NGO के साथ हाथ मिलाया| इन बच्चों को नास्ता मेरी तरफ से दे देता हूँ|

अरविन्द – सुनील यार तू नहीं बदला| तू कॉलेज में जैसा था आज भी वैसा है|

सुनील – बस यार भगवान का दिया सब है| थोड़ी बहुत कमाई भी कर लेता हूँ| अब थोड़ी ना सब ऊपर लेकर जाऊँगा| और सबसे बड़ी बात इन बच्चों को खुश देखकर factory में मेरा पूरा दिन अच्छा जाता है|

अरविन्द – सही है दोस्त| चल मेरे घर चलते है, चाय पी कर जाना|

सुनील – नहीं यार| सीधे factory जाऊँगा| शाम को आता हूँ|

अरविन्द – ok चल! bye!

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इस दूसरे घटना ने भी अरविन्द की आँखे खोल दी थी| वो समझ चूका था की उसका दोस्त factory से तो बहुत कमाता है लेकिन बच्चों को खाना खिलाने से उसे अंदर से मन की शांति मिलती है, अंदर से ख़ुशी मिलती है| और ये आंतरिक ख़ुशी पैसे से नहीं मिलती| दुनिया का सबसे आमिर आदमी भी इस आंतरिक ख़ुशी को खरीद नहीं सकता| ये ख़ुशी इंसान को दुनिया से दूर, पैसों से दूर होकर अपने आस पास ढूंढ़नी पड़ती है|

उस सुबह की घटना के बाद अरविन्द ने अपने जीवन में २ सबसे बड़े decision लिए-

1. उसने सबसे पहले ३ highly educated managers को काम पर रखा और उन्हें अपने तीनो पेट्रोल पंप का जिम्मा दे दिया| इस बार अरविन्द ने बड़ी सूझ-बुझ से इन तीनो को काम पर रखा था| कुछ महीनो के अंदर वो तीनो पेट्रोल पंप अच्छा मुनाफा करने लगे| अब अरविन्द महीने में सिर्फ एक बार इन पेट्रोल पंप में visit करता है और हिसाब check करता है| वो पूरी तरह से इस tension से दूर हो चूका है|

2. आज अरविन्द अपना पूरा समय अपने coaching center में देता है| और शाम को 4 बजे से 9 बजे तक गरीब बच्चों को free education देता है| आज वो शहर का सबसे बड़ा और दिलदार आदमी बन चूका है|
आने वाले कुछ महीनों में वो अपना खुद का college भी शुरू करने वाला है| और अरविन्द के social works को देखकर सरकार उसके college में फण्ड भी invest करेगी|

Moral of the story –

1. दोस्तों जीवन में पैसे आप कभी ना कभी कमा ही लोगे| लेकिन आपको वो एक वजह जरूर ढूंढ़नी पड़ेगी जिससे आपको अंदर से ख़ुशी भी मिले और समाज का भला भी हो सके| तभी असली मायने में आप एक educated person कहलाते हो|

2. हमे जीवन में कभी ऐसा situation भी face करना पड़ता है जिसमे हमे choice करना पड़ता है| और उस decision पर हमारा पूरा जीवन निर्भर करता है| इसलिए उस समय हमे घबराना नहीं चहिए| अपनी सूझ-बुझ से काम लेना चहिए और किसी एक choice के साथ जाना चहिए जिसमे हमे अंदर से ख़ुशी मिले| क्योकि आप दो नावों में पैर रखकर नहीं चल सकते!! इसलिए अपनी ख़ुशी के अनुसार एक नाव चुनो और उसमे आराम से सफर करो| आपकी आने वाली journey बहुत अच्छी जाएगी|

Final words-

तो कैसी लगी आपको आज की rochak kahani in hindi ? आज की rochak kahani in hindi उन लोगो के लिए थी जो हमेशा जरुरी decision लेते समय घबराते है और गलती कर बैठते है| हमे हमेशा लाइफ में कुछ ऐसा decision लेना चहिए जिसमे अपने साथ साथ दुसरो की भलाई भी छिपी हो| तभी आप एक सभ्य समाज में एक अच्छे नागरिक कहलायेंगे|

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